मोदी से मुलाकात में ट्रम्प ने पाकिस्तान और चीन को दे डाला ये बड़ा सदमा !

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पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई पहली मुलाकात के बाद जो परिदृश्य उभरा है उससे साफ है, कि भारत व अमेरिका के द्विपक्षीय रिश्तों में गर्माहट आगे भी बनी रहेगी। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत और आधिकारियों के स्तर पर जो बातचीत हुई है उससे यह भी संकेत निकलता है, कि ट्रंप पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के उस बयान को स्वीकार करते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत व अमेरिका के रिश्ते 21वीं सदी की सबसे बड़ी घटना होगी।

अगर ऐसा नहीं होता तो दोनों देशों की तरफ से जारी संयुक्त बयान में सीधे तौर पर पाकिस्तान को चेतावनी नहीं दी गई होती, और न ही चीन को परोक्ष तौर पर साउथ चाईना सी के मुद्दे पर आगाह किया गया होता। ट्रंप की अगुवाई में अमेरिकी सरकार ने चीन और पाकिस्तान के साथ हर संवेदनशील मुद्दे पर भारत का खुलकर समर्थन किया है।

संयुक्त बयान में पहली बार भारत और अमेरिका ने सीधे तौर पर पाकिस्तान को आगाह किया है, कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों में आतंकी घटनाओं को अंजाम दिलाने के लिए नहीं करे| साथ ही पाकिस्तान से यह भी कहा गया है, कि वह मुंबई हमले और इस तरह के अन्य हमलों के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए कदम उठाये।

ट्रंप-मोदी मुलाकात के दौरान अमेरिकी सरकार ने हिज्बुल आतंकी सैयद सलाहुद्दीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर पाकिस्तान को बेनकाब कर दिया है। भारत और अमेरिका ने अल कायदा, हिज्बुल, डी-कंपनी, लश्कर, जैश जैसे खूंखार आतंकी संगठनों के खिलाफ भी अपने सहयोग को लगातार मजबूत करने की बात कही है। इसमें से चार आतंकी सगंठन पाकिस्तान आधारित ही हैं। पहले भी भारत व अमेरिकी सरकार की तरफ से जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान का जिक्र होता था, लेकिन पहली बार अब उसे सीधे तौर पर बोला जा रहा है।

इसी तरह से भारत के लिए लगातार मुसीबत पैदा कर रहे पड़ोसी देश चीन के बारे में भी संयुक्त बयान में स्पष्ट संकेत है। दोनों देशों ने समुद्री विवादों में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से तय नियमों और अन्य अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन की अपील करके यह स्पष्ट कर दिया है, कि उनका इशारा किस देश की तरफ है। सभी देशों से आग्रह किया गया है, कि वे सामुद्रिक विवादों का शांतिपूर्ण तरीके से अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करते हुए समाधान करे, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर के कारोबार, जहाजों के आने जाने या उड़ानों पर कोई असर नहीं पड़े।

लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है, कि इस संयुक्त बयान में चीन की महात्वाकांक्षी वन बेल्ट वन रोड की तरफ भी इशारा किया गया है। इसमें कहा गया है, कि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के विकास को लेकर ज्यादा पारदर्शी योजना बनाने की जरुरत है, और इसके लिए कर्ज देने या वित्तीय संसाधन देने की नीति भी ज्यादा उत्तरादायी होनी चाहिए। इसमें दूसरे देशों की संप्रभुत, कानून व पर्यावरण का भी ध्यान रखना चाहिए।

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